सम्पत्ति के ई-पंजीयन की व्यवस्था 1 जुलाई से राज्य में

सम्पत्ति के ई-पंजीयन की व्यवस्था एक जुलाई 2015 से पूरे प्रदेश में लागू हो जायेगी। यह व्यवस्था जिला मुख्यालयों के साथ-साथ सभी उप पंजीयक कार्यालयों में रहेगी। यह व्यवस्था लागू होने के बाद ई-रजिस्ट्रेशन पद्धति 'सम्पदा' द्वारा भी अब सम्पत्ति का रजिस्ट्रेशन करवाया जा सकेगा। जिन दस्तावेजों का पंजीयन रजिस्ट्रीकरण अधिनियम 1908 में अनिवार्य नहीं है, उनका ई-पंजीयन ऐच्छिक रहेगा। उल्लेखनीय है कि 5 जिले के मुख्यालयों पर 15 दिसम्बर 2014 से ई-पंजीयन (सम्पदा) की व्यवस्था लागू की गई थी। यह जिले हैं उज्जैन, सीहोर, टीकमगढ़, बालाघाट और अनूपपुर। इन जिले में अभी तक 14 हजार 235 ई-पंजीयन हो चुके हैं। इन जिले में भौतिक पंजीयन की व्यवस्था पूरी तरह समाप्त हो गई है। सबसे ज्यादा 7258 ई-पंजीयन उज्जैन में, 2014 सीहोर, 1128 अनूपपुर, 1393 टीकमगढ़ और 2316 ई-पंजीयन बालाघाट में हुए हैं।
इन ई-पंजीयन से शासन को ई-स्टाम्प के जरिये 64 करोड़ 73 लाख रुपये का राजस्व प्राप्त हुआ है। प्रदेश में होने वाले पंजीयन की स्थिति को हर आधा घंटे में अपडेट किया जाता है। कोई भी व्यक्ति mpigr.gov.in पर जाकर वहाँ सम्पदा में लॉग-इन कर घर बैठे अपनी सम्पत्ति के मूल्यांकन का पता कर सकता है। यह मूल्यांकन जिले की कलेक्टर गाइडलाइन के अनुसार होता है। साथ ही बेंक से लिये जाने वाले लोन और लगने वाली ड्यूटी का भी घर बैठे ही पता लगाया जा सकता है।

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