मध्यप्रदेश में बिजली की उपलब्धता वर्ष 2003 के मुकाबले 240% बढ़ी

मध्यप्रदेश में बिजली की उपलब्धता वर्ष 2003 के मुकाबले 240 प्रतिशत बढ़ी है। अटल ज्योति अभियान की सफलता प्रदेश में जून 2013 से गैर कृषि उपभोक्ता को 24 घंटे और कृषि उपभोक्ताओं को 10 घंटे गुणवत्तापूर्ण बिजली दी जा रही है। वर्ष 2003 में राज्य में 4530 मेगावाट बिजली की उपलब्धता थी, जो वर्ष 2015 में बढ़कर 15 हजार 400 मेगावाट हो गई है। अब प्रदेश में वर्ष 2022 तक बिजली की माँग की आपूर्ति के हिसाब से बिजली की व्यवस्था कर ली गई है।
ऊर्जा विभाग ने पिछले चार वर्ष में ट्रांसमिशन प्रणाली की ट्रांसफार्मेंशन क्षमता में 33 प्रतिशत की वृद्धि की है। वर्ष 2010-11 में यह क्षमता 34 हजार 232 एमव्हीए थी। वर्ष 2014-15 में बढ़कर यह 45 हजार 457 एमव्हीए हो गई। इसी दौरान 50 नये अति उच्च दाब केन्द्र स्थापित किये गये हैं। प्रदेश में वर्ष 2003 में ट्रांसमिशन प्रणाली क्षमता 3890 मेगावाट हुआ करती थी, जो वर्ष 2015 में बढ़कर 12600 मेगावाट हो गई है। वर्तमान में प्रदेश में ट्रांसमिशन हानियों का स्तर 2.82 प्रतिशत है, जो कि देश में न्यूनतम स्तर पर है। प्रदेश में बिजली के सुधार के क्षेत्र में फीडर विभक्तिकरण के साथ अधोसंरचना के व्यापक काम किये गये हैं। इन 4 वर्ष में 11 के.व्ही. लाइनों की लम्बाई में 55 प्रतिशत की वृद्धि हासिल की गई है। प्रदेश में मार्च 2015 की स्थिति में 11 के.व्ही. लाइन 3 लाख 13 हजार किलोमीटर लम्बाई की थी, जो मार्च 2011 की स्थिति में मात्र 2 लाख 2 हजार किलोमीटर हुआ करती थी।

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