मध्यप्रदेश को लगातार चौथी बार कृषि कर्मण पुरस्कार

मध्यप्रदेश को लगातार चौथी बार कृषि कर्मण पुरस्कार दिया गया है।  मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान की कृषि क्षेत्र में क्रांतिकारी परिवर्तन लाने की सोच और लगन का परिणाम रहा कि किसानों ने भी भरपूर सहयोग दिया और प्रदेश को लगातार चौथी बार कृषि कर्मण पुरस्कार मिला। प्रदेश में सभी खाद्यान्न का उत्पादन वर्ष 2014-15 में बढ़कर 320.43 लाख टन हो गया है। यह पिछले साल के खाद्यान्न उत्पादन 242.40 लाख टन से 32.19 प्रतिशत ज्यादा है। प्रदेश ने कृषि से जुड़े हर क्षेत्र में शानदार प्रदर्शन किया है। कृषि केबिनेट के कारण किसानों के हित में होने वाले फैसलों में तेजी आयी। सबसे पहले प्रदेश ने कृषि के लिये जरूरी सिंचाई पर ध्यान दिया। वर्ष 2008-09 में सिंचाई 9.75 लाख हेक्टेयर में होती थी जो वर्ष 2014-15 में बढ़कर 32.29 लाख हेक्टेयर  तक पहुँच गई है। सभी स्त्रोतों से वर्ष 2012-13 में कुल सिंचाई 89.65 लाख हेक्टेयर में सिंचाई हुई थी, जो वर्ष 2014-15 में बढ़कर 102.48 लाख हेक्टेयर में हो गई है। कपिल धारा योजना में 27 हजार 448 कुओं का निर्माण हुआ है। तीसरी फसल का क्षेत्र वर्ष 2014-15 में बढ़कर 3.60 लाख हेक्टेयर हो गया है।  इसी प्रकार पड़त भूमि वर्ष 2007 में 14.33 लाख हेक्टेयर थी, जो वर्ष 2014-15 में घटकर 6.95 लाख हेक्टेयर रह गई है।
किसानों को आर्थिक सहायता देने के उद्देश्य से सहकारी बैंकों से उन्हें वर्ष 2014-15 में 13 हजार 598 करोड़ रूपये का लोन दिया गया। वर्ष 2010-11 में यह लोन राशि 5845 करोड़ रूपये थी। अब तक 78.85 लाख किसानों के पास क्रेडिट कार्ड की सुविधा है। सिर्फ वर्ष 2014-15 में ही 13.36 लाख किसानों को किसान क्रेडिट कार्ड उपलब्ध करवाये गये हैं। बीज उत्पादन के क्षेत्र में अनूठी पहल करते हुए 2400 बीज उत्पादक सहकारी समितियाँ बन गई हैं। इन समितियों के किसान सदस्यों ने वर्ष 2014-15 में 29.45 लाख क्विंटल बीज का उत्पादन किया। इससे बीज की उपलब्धता बढ़ गई है। किसानों को दस घंटे बिजली मिल रही है। वर्ष 2014-15 में 4480 करोड़ रूपये की सब्सिडी उन्हें दी गई। उन्हें 6.33 लाख अस्थाई और 3.03 लाख स्थाई पम्प कनेक्शन दिये गये हैं। किसानों के पास आज भरपूर बिजली है। वर्ष 2014-15 में 16.1 बिलियन यूनिट बिजली किसानों के पास उपलब्ध थी।

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